धौलपुर, 27 फरवरी। जिले में स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा देते हुए धौलपुर पुलिस आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल कर रही है। पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान के निर्देशन में राजकॉप (RajCop) ऐप के माध्यम से संदिग्धों और आदतन अपराधियों की पहचान में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडीएफ) बाड़ी कमल कुमार जांगिड़ के सुपरविजन में जिले के सभी थानों और चौकियों पर राजकॉप ऐप का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से पुलिस संदिग्ध व्यक्तियों, असामाजिक तत्वों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की तुरंत पहचान कर पा रही है। नाकाबंदी में मिली अहम सफलता गुरुवार को ए श्रेणी की जिला स्तरीय नाकाबंदी के दौरान बाड़ी कस्बे में थानाधिकारी देवेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में सघन वाहन चेकिंग की जा रही थी। इसी दौरान एक संदिग्ध वाहन चालक को रोककर राजकॉप ऐप के फेस रिकग्निशन फीचर से सत्यापन किया गया। फोटो मिलान के बाद उसकी पहचान सचिन शर्मा निवासी आंगई, धौलपुर के रूप में हुई। डिजिटल रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पूर्व में जयपुर के सिंधी कैंप थाने में आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज है। मौके पर आरोपी ने भी इसकी पुष्टि की। क्या है राजकॉप ऐप की खासियत? राजकॉप ऐप सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) से जुड़ा हुआ है, जिससे पुलिस को देशभर के आपराधिक रिकॉर्ड तक त्वरित पहुंच मिलती है। रियल-टाइम डेटा एक्सेस: फोटो खींचते ही संदिग्ध का पूरा आपराधिक इतिहास सामने आ जाता है। उन्नत फेस रिकग्निशन तकनीक: हुलिया बदलने पर भी पहचान संभव। मानवीय उपयोग: गुमशुदा व्यक्तियों, लावारिस बच्चों और अज्ञात शवों की शिनाख्त में भी सहायक। पुलिस अधीक्षक सांगवान ने बताया कि तकनीक और सूचना तंत्र के बेहतर समन्वय से अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो रहा है। इससे न केवल अपराधियों की धरपकड़ आसान हुई है, बल्कि आमजन में सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है। धौलपुर पुलिस की यह पहल स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।